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20. रागु माली गउड़ा

इस राग को गायन शैली में सबसे कठिन राग माना जाता है। यह भी धारणा है कि यह राग इस्लाम परम्परा की सूफी धरणा में से आया है। इस राग से सम्बन्धित बाणी श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी के अंग 984 से 988 तक दर्ज है। इस राग को खुशी व उल्लास की तरँगें पैदा करने वाला राग माना जाता है। खुशी व उल्लास भी वह जिनका सम्बन्ध दुनियावी नहीं, बल्कि ईश्वरीय हो। यह राग दिन ढलते समय गायन किया जाता है।

महत्वपूर्ण नोट:
1. श्री गुरू रामदास जी की बाणी के चउपदे आदि "अंग 984 से लेकर अंग 986" लाइन 6 तक दर्ज हैं।
2. श्री गुरू अरजन देव जी के चउपदे अंग 986 लाइन 7 से लेकर अंग 987 लाइन 16 तक दर्ज हैं।
3. श्री गुरू अरजन देव जी के दुपदे अंग 987 लाइन 17 से लेकर अंग 988 लाइन 8 तक दर्ज हैं।
4. भक्त नामदेव जी की बाणी राग माली गउड़ा में अंग 988 लाइन 9 से लेकर अंग 988 तक ही दर्ज है।

रागु माली गउड़ा में बाणी सम्पादन करने वाले बाणीकार:

गुरू साहिबान
1. गुरू रामदास जी
2. गुरू अरजन देव जी

भक्त साहिबान
1. भक्त नामदेव जी

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 
     
     
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