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581. फर्रूखसीयर किस स्थान का सूबेदार (राज्यपाल) था ?

  • बँगाल व बिहार प्राँत

582. बादशाह जहाँदार शाह और फर्रूखसीयर के मध्य युद्ध कब हुआ और उसका क्या परिणाम रहा ?

  • 31 दिसम्बर 1712 ईस्वी को, जिसमें जहाँदार शाह पराजित हो गया और उसकी हत्या 1 फरवरी 1713 ई0 को कर दी गई।

583. फर्रूखसीयार के सम्राट बनने पर उसने सिक्खों के प्रति कैसी नीति अपनाई ?

  • फर्रूखसीयार के सम्राट बनने पर उसने सिक्खों के प्रति बहुत कड़ी नीति अपनाई। उसने फिर से मुहम्मद अमीन को भारी लश्कर देकर सढ़ौरा किला फतेह करने भेज दिया। यह सिपाहसलार कुछ समय के लिए सढौरा का घेराव छोड़कर जहाँदार शाह की सहायता के लिए दिल्ली गया हुआ था। इसके वापस लौट आने पर सढौरा के किले व लोहगढ़ के किले पर लम्बे समय का घेराव करके शाही सेना बैठ गई।

584. सढौरा व लोहगढ़ के किले दुबारा छिन जाने के बाद बाबा बन्दा सिंघ बहादर जी ने अपना गुप्तवास कहाँ बनाया था ?

  • अपने जन्म स्थान राजौरी

585. बन्दा सिंघ बहादर जी का दूसरा विवाह किससे हुआ ?

  • साहिब कौर के साथ जिसके उदर से रंजीत सिंह नामक पुत्र उत्पन हुआ। इसी बालक से बंदा सिंघ जी का वँश चलता आ रहा है।

586. गुरदासपुर नँगल की गढ़ी या अहाते का वास्तविक नाम क्या था ?

  • भाई दुनीचन्द का अहाता

587. शाही सेना ने गुरदास नँगल के अहाते का घेराव कब किया ?

  • अप्रैल सन् 1715 ई0 के आरम्भ में

588. समय रहते खाद्यान के अभाव को देखते हुए दुनीचन्द की अहातानुमा गढ़ी कौन खाली कर गये ?

  • सरदार विनोद सिंह जी

589. "इबादतनामें" का लेखक मुहम्मद कासिम जो कि गुरदास नँगल के अहाते का प्रत्यक्षदर्शी था क्या लिखता है ?

  • जनूनी सिक्खों के बहादुरी और दिलेरी के कारनामें आश्चर्यचकित कर देने वाले थे। जल्दी ही सिक्खों ने गुरिला युद्ध का सहारा लिया। वे प्रतिदिन दो या तीन बार प्रायः चालीस अथवा पचास की सँख्या में एक काफिले के रूप में अहाते से बाहर निकलते और शाही लश्कर पर टूट पड़ते। गफलत में अथवा सहज में बैठे सिपाहियों को क्षण भर में काट डालते और खाद्यान अस्त्र-शस्त्र इत्यादि जो हाथ लगता लूट ले जाते। जब शाही सेना सर्तक होती वे तब छू-मँत्र हो जाते।

590. बाबा बन्दा सिंघ बहादुर जी ने आत्मसमर्पण क्यों किया ?

  • बंदा सिंघ जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मैं प्राचश्चित करना चाहता हूँ क्योंकि हमारे हाथों न जाने कितने निर्दोष व्यक्तियों की भी हत्या हुई है। अब हम साम्राज्य स्थापित करने के लिए नहीं लड़ेंगे बल्कि अपनी भूलों को सुधारनें के लिए अपने किये अपराधों को अपने खून से धो देने के लिए मृत्यु से लड़ेंगे। यही हमारी आलौकिक शक्ति का प्रदर्शन अथवा शहीदी प्राप्त करने का चमत्कार होगा। बंदा सिंह जी ने कहा कि गुरमति सिद्धाँतों अनुसार किये गये कर्मों का लेखा देना ही पड़ता है। अतः हमें पुनर्जन्म न लेना पडे। इसलिए हमें इस जन्म में दण्ड स्वीकार कर लेना चाहिए। ताकि हम प्रभु चरणों में स्थान प्राप्त कर सकें। वैसे भी स्वेच्छा से शहीदी प्राप्त करना अमूल्य निधि है।

591. बाबा बन्दा सिंघ बहादुर जी ने आत्मसमर्पण कब किया ?

  • दिसम्बर के प्रारम्भ में सन् 1715 ई0 को।

592. मुहम्मद हादी कामवर खान, बाबा बन्दा सिंघ द्वारा किये गये आत्मसमर्पण के बारे में क्या लिखता है ?

  • मुहम्मद हादी कामवर खान लिखता है कि "यह किसी की बुद्धिमत्ता या शूरवीरता का परिणाम न था अपितु परमात्मा की कृपा थी कि यह इस प्रकार हो गया, अन्यथा हर कोई जानता है कि स्वर्गीय बादशाह बहादुर शाह ने अपने चारों शहजादों तथा असँख्य बड़े-बड़े अफसरों सहित इस विद्रोह को मिटाने के कितने प्रयत्न किये थे। परन्तु वह सब विफल हुए थे।"

593. बन्दा सिंघ जी के साथ उनके परिवार में से किसेकिसे गिरफ्तार किया गया था ?

  • बंदा सिंह की पहली पत्नी, उसके चार वर्षीय पुत्र अजय सिंह तथा उसकी आया को।

594. बन्दा सिंघ व उसके साथियों को दिल्ली में किस कारावास में रखा गया था ?

  • त्रिपोलिया कारावास

595. बन्दा सिंघ जी की पत्नि ने स्वाभिमान को ध्यान रखते हुए क्या कदम उठाया ?

  • कुँए में कूदकर आत्महत्या कर ली।

596. 5 मार्च सन् 1716 ई0 को दिल्ली के त्रिपोलिया दरवाजे की ओर के चबूतरे पर जो कोतवाली के सामने स्थित है, प्रतिदिन कितने सिक्खों की हत्या की जाने लगी ?

  • 100 सिक्खों की

597. जल्लाद प्रत्येक सिक्ख सिपाही को कत्ल करने से पहले, काजी का फतवा सुनने को कहता था। फतवे में वह क्या कहता था ?

  • काजी हर सिक्ख सिपाही से पूछता यदि तुम इस्लाम कबूल कर लो तो तुम्हारी जान बख्श दी जाएगी। परन्तु कोई भी सिपाही अपनी जान बख्शी की बात सुनना भी नहीं चाहता था। उसे तो केवल शहीद होने की चाहत ही रहती थी। इस प्रकार सभी सिपाही काजी की बात ठुकराकर जल्लाद के पास आगे बढ जाते और उसे कहते मैं मरने के लिए तैयार हूँ।

598. ईस्ट इंडिया कम्पनी के राजदूत, सर जौहर सरमैन तथा एडवर्ड स्टीफैनसन ने सिक्ख कैदियों का कत्लेआम अपनी आँखों से देखा। इन महानुभवों ने जो विचित्र प्रभाव अनुभव किया, वे अद्भुत घटनाक्रम को लिखित रूप में सँकलित करके अपने हैड कवार्टर कलकत्ता भेजा। उन्होंने अपने पत्र न0 12 में दिनांक 10 मार्च सन् 1716 ई0 को क्या लिखा ?

  • वे सिक्ख कैदी जिन पर बगावत (देशद्रोह) का आरोप था। मृत्यु स्वीकार करते समय उन्होंने जिस धैर्य और साहस का परिचय दिया वह अद्भुत और विचित्र घटना है। क्योंकि ऐसा होता नहीं, साधारणतः अपराधी डर के मारे चीखता चिल्लाता है, परन्तु वहाँ तो तथाकथित अपराधी मृत्यु के लिए स्वयँ को समर्पित कर रहे थे और शाँतचित अपने भाग्य को स्वीकार करते थे। सभी को जान बख्शी का लालच दिया गया बशर्ते वह इस्लाम कबूल कर ले परन्तु अंत तक यह नहीं मालुम हो सका कि किसी सिक्ख कैदी ने इस्लाम स्वीकारा हो।

599. बन्दा सिंघ बहादुर जी की शहीदी कब हुई ?

  • 9 जून सन 1716 ईस्वी

600. बन्दा सिंह बहादुर के पुत्र अजय सिंह को किस प्रकार शहीद किया गया ?

  • बन्दा सिंघ के पुत्र को उनकी झोली में डाला गया और कहा गया कि इसकी हत्या करो। परन्तु क्या कोई पिता कभी अपने पुत्र की हत्या कर सकता है ? उन्होंने न कर दी। बस फिर क्या था जल्लाद ने एक बड़ी कटार से बच्चे के टुकडे-टुकडे कर दिये और उसका तड़पता हुआ दिल निकालकर बंदा सिंह के मुँह में ठुँस दिया।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 
     
     
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