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15. जल की समस्या का समाधान (माहीसर, हिमाचल प्रदेश)

श्री गुरू नानक देव जी जोहड़सर से आगे बढ़े तो कुछ श्रद्धालुओं ने उन्हें अपने गाँव मे चलने की प्रार्थना की और कहा, हे गुरुदेव जी ! हम लोग बहुत पिछड़े हुए हैं, अतः हमारे गाँव में अँधविश्वास का साम्राज्य है। यदि आप वहाँ जागृति लाएँ तो आपकी प्रेरणा से काफी परिवर्तन आ सकता है। गुरुदेव ने उनका अनुरोध तुरन्त स्वीकार कर लिया और उनके साथ उस गाँव में पहुँचे जो कि ऊँचे पर्वत के शिखर पर बसा था। उस गाँव में जनजीवन वर्षा के पानी पर निर्भर करता था। अतः पीने का पानी दूर से लाना पड़ता था। गुरुदेव की वहाँ के चौधरी माही से जब भेंट हुई तो वह गुरुदेव के वचनों से बहुत प्रभावित हुआ। उसने गुरुदेव की बहुत सेवा की और उनको प्रसन्न करके प्रार्थना करने लगा कि उनके गाँव में पीने योग्य निर्मल जल की कमी है। और वे कृपा दृष्टि करें। गुरुदेव ने जनसाधारण की समस्या को देखते हुए एक दिन समस्त गाँव वालों की सभा बुलाई और उसमें हरि-यश किया। अंत में एक उचित स्थान देखकर वहाँ पर एक बावड़ी बनाने के लिए आधारशिला रखने का उन्हीं लोगों को आदेश दिया। जिसके निर्माण होते ही वह प्रभु कृपा से जल से भर गई। इस प्रकार वहाँ पर पीने के पानी की समस्या हल हो गई। गुरुदेव के प्रस्थान के पश्चात् चौधरी माही ने बावड़ी के आगे एक ताल का निर्माण करवाया जो कि बाद में माहीसर के नाम से जाना जाने लगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 
     
     
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